गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के लिए साल के दोनों नवरात्र बेहद खास होते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। लिहाजा उनके लिए भी ये खास है। नवरात्रि के पहले दिन कलश पूजन के साथ गोरक्षपीठ में अनुष्ठान शुरू हो जाता है। सारी व्यवस्था मठ की पहली मंजिल पर ही होती है। परंपरा है कि इस दौरान पीठाधीश्वर और उनके उत्तराधिकारी मठ से नीचे नहीं उतरते।
शारदीय नवरात्र में तो यह अनिवार्य होता है जबकि चैत्र नवरात्र में भी ऐसी ही उम्मीद की जाती है। इस दौरान पूजापाठ के बाद रूटीन के काम और खास मुलाकातें ऊपर ही होती हैं। नवमी के दिन कन्या पूजन होता है, जिसे पीठ के उत्तराधिकारी या पीठाधीश्वर करते हैं। वर्षों से योगी आदित्यनाथ इस परंपरा को निभाते रहे हैं।
वहीं इस बार कोरोना के कारण लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन भी नहीं किया। हाल के वर्षों में यह पहला मौका है जब योगी ने कन्या पूजन नहीं किया। परंपरा पर फर्ज को तरजीह देने की यह पहली मिसाल नहीं है। अलबत्ता इस बार कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए वह गोरखनाथ मंदिर ही नहीं गए। योगी जहां रहे वहीं परंपरा के अनुसार पूजापाठ किया।